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किच्छा में नतीजों के बाद बदले सुर! कल तक पुलिस पर आरोप, अब तारीफों के पुल

किच्छा में नतीजों के बाद बदले सुर! कल तक पुलिस पर आरोप, अब तारीफों के पुल

राजीव चावला/ एडिटर

किच्छा। नगर पालिका चुनाव की मतगणना पूरी होने के बाद राजनीतिक गलियारों में एक अलग ही चर्चा शुरू हो गई है। जिन नेताओं और समर्थकों की ओर से चुनाव के दौरान पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे थे और पक्षपात के आरोप लगाए जा रहे थे, वही अब मतगणना शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली की तारीफ करते नजर आ रहे हैं।

ऊधम सिंह नगर की किच्छा नगर पालिका में 22 सितंबर को मतदान हुआ था। मतदान के दौरान हुए विवाद और तनाव के बाद मतगणना टल गई थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आज कृषि उत्पादन मंडी समिति परिसर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतपेटियां खोली गईं।

अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस के राजेश प्रताप सिंह और भाजपा के संदीप अरोड़ा आमने-सामने थे। चुनाव मैदान में भले ही भाजपा की ओर से संदीप अरोड़ा प्रत्याशी थे, लेकिन इस चुनाव को पूर्व विधायक राजेश शुक्ला की प्रतिष्ठा से भी जोड़कर देखा जा रहा था। वहीं कांग्रेस की ओर से चुनाव की कमान विधायक तिलक राज बेहड़ के हाथों में रही।

मतदान के दौरान हुए विवाद को देखते हुए एसएसपी अजय गणपति के निर्देश पर मतगणना स्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। करीब 550 पुलिसकर्मियों, PAC की कंपनियों के साथ ड्रोन और CCTV कैमरों के जरिए पूरे परिसर की निगरानी की गई। प्रवेश भी निर्धारित पास के आधार पर ही दिया गया।

कड़ी सुरक्षा के बीच मतगणना प्रक्रिया बिना किसी बड़े विवाद के पूरी हुई। इसके बाद विपक्षी नेताओं और समर्थकों की ओर से भी पुलिस की कानून-व्यवस्था व्यवस्था की तारीफ की गई।

लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है—जो लोग चुनाव के दौरान पुलिस पर पक्षपात और चुनाव प्रभावित करने जैसे गंभीर आरोप लगा रहे थे, वही नतीजे सामने आने के बाद पुलिस की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं।

तो क्या पुलिस की भूमिका सिर्फ तब तक सवालों के घेरे में थी, जब तक नतीजे सामने नहीं आए थे?

क्या नतीजे अपने पक्ष में आते ही पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए जा रहे सवाल भी खत्म हो गए?

किच्छा की सियासत में अब चर्चा सिर्फ जीत-हार की नहीं, बल्कि चुनाव के दौरान लगाए गए आरोपों और नतीजों के बाद बदले राजनीतिक सुरों की भी हो रही है।