Breaking News

नहीं बुझ रही Congress में गुटबाजी की आग, 2027 में कैसे होगी नैया पार? Udham Singh Nagar में बिगड़ सकते हैं हालात

Share

राजीव चावला / एडिटर

विधायक तिलकराज बेहड़ के कंधे पर बन्दुक रखकर अपना हित साधने चाहते है कुछ नेता, मेयर का चुनाव हारने के बाद निष्क्रिय हो चुके कांग्रेस नेता मोहन खेडा अब विधायक का चुनाव लड़ने का सपना देख रहे है ,जब कि कांग्रेस में शामिलहुए राजकुमार ठुकराल यह स्पष्ट कर चुके है कि पार्टी संगठन जिसे टिकट देगा उसे चुनाव लड़ाऊंगा. ल्केकिन बाबजूद उसके गुटों में बंटीनज़र आ रही है कांग्रेस 

उत्तराखंड में 2027 Assembly Election भले अभी दूर हो, लेकिन Congress के भीतर चल रही internal factionalism ने सियासी माहौल को अभी से गरमा दिया है। खासकर ऊधम सिंह नगर जिले में पार्टी की अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है, जो आने वाले समय में पार्टी के लिए बड़ा challenge बन सकती है।

जिला मुख्यालय रुद्रपुर में Congress दो बड़े गुटों में बंटी नजर आ रही है। एक ओर नेता प्रतिपक्ष और बाजपुर विधायक यशपाल आर्य का गुट मजबूत पकड़ बनाए हुए है, वहीं दूसरी तरफ किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़ का camp भी पूरी तरह active दिखाई दे रहा है। दोनों गुटों के बीच coordination की कमी कई मौकों पर सामने आ चुकी है।

हाल ही में इसका ताजा उदाहरण उस समय देखने को मिला जब DM office के बाहर किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हरेंद्र सिंह लाड़ी के नेतृत्व में किसानों की समस्याओं को लेकर protest program आयोजित किया गया था। यह कार्यक्रम सुबह 11:30 बजे तय था, लेकिन इसी समय के आसपास तिलक राज बेहड़ समर्थकों ने रुद्रपुर कोतवाली में एक अलग parallel protest शुरू कर दिया।

यह दूसरा कार्यक्रम Congress प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के खिलाफ कथित साजिश को लेकर पुलिस में दी गई तहरीर पर कार्रवाई न होने के विरोध में था। एक ही समय पर दो अलग-अलग कार्यक्रम होने से न सिर्फ media attention बंट गया, बल्कि कार्यकर्ताओं की मौजूदगी भी दो हिस्सों में divide हो गई।

राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। क्या यह महज coincidence था या फिर एक सोची-समझी political strategy के तहत एक-दूसरे के प्रभाव को कम करने की कोशिश की गई? इस पर चर्चा तेज है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह internal conflict केवल रुद्रपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर किच्छा, जसपुर, खटीमा, बाजपुर और नानकमत्ता जैसी अन्य विधानसभा सीटों पर भी पड़ सकता है। इस तरह की स्थिति ground level पर कार्यकर्ताओं के morale को कमजोर कर रही है।

इसी बीच, स्थानीय स्तर पर कई नेता अपनी-अपनी political ground मजबूत करने में जुटे हैं। रुद्रपुर में विधायक तिलकराज बेहड़ को बिना विश्वास में लिए भी कुछ नेता निजी हित साधने के लिए पूर्व मेयर प्रत्याशी मोहन खेड़ा लगातार active बताए जा रहे हैं और संगठन के भीतर अपनी पकड़ मजबूत करने की strategy पर काम कर रहे हैं।

वहीं, राजकुमार ठुकराल भी organization के banner तले पार्टी को मजबूत करने के प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, कुछ नेता ऐसे भी हैं जो openly किसी गुट में नजर नहीं आते, लेकिन उनकी behind-the-scenes activity अंदरूनी राजनीति को और complex बना रही है।

जब इस पूरे मुद्दे पर Congress नेताओं से बात की गई तो उन्होंने factionalism की बात को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि पार्टी पूरी तरह united है और सभी नेता मिलकर संगठन को मजबूत करने में लगे हैं।

लेकिन ground reality इससे अलग तस्वीर पेश कर रही है। कार्यकर्ताओं के बीच confusion की स्थिति बनी हुई है और स्पष्ट leadership की कमी महसूस की जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर Congress को 2027 में strong comeback करना है, तो उसे सबसे पहले अपने internal issues को resolve करना होगा। गुटबाजी की यह आग पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है।

अगर समय रहते इसे control नहीं किया गया, तो ऊधम सिंह नगर में Congress के लिए चुनावी राह आसान नहीं होगी।

Rajeev Chawla


Share