
नशे का कथित कारोबार: निर्माण से तस्करी तक नेटवर्क पर उठे सवाल
ख़बर पड़ताल ब्यूरो। उत्तराखंड को नशामुक्त बनाने के लिए प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री लगातार अभियान चलाने की बात कर रहे हैं, लेकिन जिला मुख्यालय रुद्रपुर में नशे के कथित कारोबार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि शहर की शांति कॉलोनी रोड़, वार्ड नं 14 में कथित तौर पर नशीले पदार्थ, विशेषकर स्मैक, के निर्माण से लेकर उसकी सप्लाई तक का नेटवर्क सक्रिय है।
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि इस कथित नेटवर्क की जानकारी पुलिस की विभिन्न एजेंसियों के साथ-साथ खुफिया विभाग तक को है। इतना ही नहीं, पड़ोसी जिलों और उत्तर प्रदेश के रामपुर, बरेली तथा पीलीभीत क्षेत्र में सक्रिय सप्लाई नेटवर्क से भी इसके तार जुड़े होने की चर्चा है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
वर्षों से चल रहे कारोबार पर कार्रवाई क्यों नहीं?
सूत्रों के अनुसार, संबंधित इलाके में लंबे समय से संदिग्ध गतिविधियों को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर वर्षों से कथित रूप से चल रहे इस कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो पाई।
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ मकानों के स्वरूप और नक्शे में समय के साथ बदलाव हुए हैं। वहीं, कुछ संदिग्ध वाहनों की आवाजाही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि इन वाहनों का इस्तेमाल कथित तौर पर नशीले पदार्थों की सप्लाई में किया जाता है। इन आरोपों की भी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
बड़ी पुलिस एजेंसी के इनपुट के बाद भी कार्रवाई नहीं?
सूत्रों का दावा है कि प्रदेश की एक बड़ी पुलिस एजेंसी ने भी रुद्रपुर पहुंचकर इस कथित नेटवर्क से संबंधित जानकारी जुटाई थी। बताया जा रहा है कि एजेंसी को कुछ अहम इनपुट भी मिले थे। इसके बावजूद यदि अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है तो यह पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि स्थानीय पुलिस, खुफिया तंत्र और अन्य एजेंसियों को कथित नेटवर्क की जानकारी है तो फिर कार्रवाई किस स्तर पर अटकी हुई है?
नशामुक्त उत्तराखंड के दावे के बीच बड़ा सवाल
एक तरफ सरकार नशे के खिलाफ सख्त अभियान चलाने और युवाओं को नशे से दूर रखने की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ जिला मुख्यालय में इस तरह के कथित नेटवर्क की मौजूदगी के आरोप चिंता बढ़ाने वाले हैं।
अब देखना होगा कि पुलिस और प्रशासन इन आरोपों का संज्ञान लेकर मामले की निष्पक्ष जांच कराते हैं या नहीं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो निर्माण, सप्लाई और तस्करी से जुड़े पूरे नेटवर्क का खुलासा कर उसके खिलाफ कार्रवाई जरूरी होगी।
