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“डिजिटल अरेस्ट ठगी” के झांसे में आया सॉफ्टवेयर इंजीनियर, लग गया लाख का चूना; ठग ने खुद को बताया क्राइम ब्रांच का अधिकारी; पढ़िए और रहिए सावधान…

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ख़बर पड़ताल ब्यूरो:- आज कल देश में डिजिटल अरेस्ट ठगी का जाल बिछ गया है, ये साइबर अपराधियों का नया तरीका है लोगों को डरा कर उनसे लाखों रुपए हड़पने का एक ऐसा ही मामला हल्द्वानी शहर से सामने आया है…

मामला हल्द्वानी का है जहां साइबर ठगों ने खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर सॉफ्टवेयर इंजीनियर को डिजिटल अरेस्ट किया और उससे 1 लाख रुपए ठग लिए…

दरअसल, इंजीनियर को ड्रग्स का नाम लेकर डराया और कहा कि उसके नाम से ताइवान जा रहे कोरियर में ड्रग्स बरामद हुई है. इसके बाद डरे सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने जालसाजों के झांसे में आकर ₹100000 गंवा दिए. इस मामले में साइबर पुलिस स्टेशन ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, बताया जा रहा है कि मुखानी थाना क्षेत्र लामाचौड़ निवासी निखिलेश गुणवंत पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं. पुलिस को दिए शिकायती पत्र में उन्होंने कहा कि बीती एक अप्रैल को उनके पास फोन आया. फोन करने वाले ने खुद को मुंबई साइबर क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया और कहा कि ताइवान जा रहे एक कोरियर में निखिलेश का आधार कार्ड लगा है. पूछताछ के लिए जालसाज ने निखिलेश को मुंबई बुलाया, लेकन निखिलेश ने असहमति जताई, इस पर जालसाजों ने कहा कि अगर आपको मुंबई आने से बचाना है तो हमारे कहने के अनुसार चलो. इसके बाद आरोपियों ने स्काइप एप से वीडियो कॉल की. वीडियो कॉल पर आरोपी ने पहले तो निखिलेश से कमरे के दरवाजे बंद करवाए और इसके बाद पारिवारिक, व्यवसायिक और साथ ही बैंक खातों की जानकारी मांगी. आखिर में आरोपियों ने निखिलेश से ही उसके हाथ बंधवा दिए, जिसे आरोपियों की भाषा में डिजिटल अरेस्ट कहा जाता है. फिर अरेस्ट वारंट की धमकी देकर एक लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए, रकम मिलने के बाद जालसाजों ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर को वीडियो कॉल पर ही हाथ बांधकर बैठने को बोला और मोबाइल आदि इस्तेमाल न करने की चेतावनी दी. यही नहीं इस मामले को किसी से नहीं बताने को कहा. कमरे में डरे-सहमे निखिलेश को देखकर परिजनों ने बात पूछी तो पूरा मामला सामने आया. इसके बाद परिवार वालों को ठगी का एहसास हुआ. पूरे मामले में परिवार वाले मुखानी थाने पहुंचे मामला दर्ज कराया है, जिसके बाद मामले को साइबर सेल ट्रांसफर किया गया है।

रिपोर्ट: साक्षी सक्सेना 


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