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*देवशयनी एकादशी:- आज से 4 महीने तक योगनिद्रा में रहेंगे भगवान विष्णु, 118 दिन नहीं होंगे कोई शुभ कार्य; जानिए एकादशी का महत्व।*

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ख़बर पड़ताल ब्यूरो:- सनातन धर्म में एकादशी का बहुत अधिक महत्व होता है, इस दिन सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा अर्चना होती है कई लोग इस दिन व्रत रखते हैं, कई लोग इस दिन प्याज लहसुन और चावल, मांस खाने परहेज करते हैं, वहीं सनातन धर्म में वैसे तो हर एक एकादशी का महत्व है लेकिन साल में दो सबसे बड़ी एकादशी देवशयनी एकादशी और देवउठनी एकादशी का अलग ही महत्व है क्योंकि एक और जहां का देव शयनी एकादशी पर भगवान विष्णु निद्रा में चले जाते हैं तो वहीं देवउठनी एकादशी पर भगवान की पूजा अर्चना कर उन्हे उठाया जाता है।

(रिपोर्ट:- साक्षी सक्सेना)

देवशयनी एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. इस व्रत को करने से व्यक्ति को भगवान विष्णु की कृपा के साथ साथ शिवलोक में भी स्थान मिलता है. आज के दिन यानी एकादशी पर भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं और अगले 4 महीने तक भगवान विष्णु योग निद्रा में ही रहते हैं.देवशयनी एकादशी का व्रत आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन रखा जाता है.जिस दिन से भगवान विष्णु निद्रा में जाते हैं तभी से चातुर्मास प्रारंभ हो जाता है. जिस समय देव सोते हैं इस समय संसार का पालन पोषण भगवान शिव करते हैं। इस साल चातुर्मास आज देवशयनी एकादशी से शुरू हो जायेगे समापन 12 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर होगा.इस वर्ष चातुर्मास 118 दिन का रहेगा. पिछले साल 148 दिन 5 माह का था. वर्ष 2023 में अधिक मास होने के कारण दो श्रावण मास थे. इस कारण चातुर्मास 148 दिन का था। इस वर्ष 30 दिन कम यानी चार माह का चातुर्मास रहने के कारण सभी बड़े त्योहार 10 से 11 दिन पहले आ रहे हैं।

भगवान विष्णु को सृष्टि का पालनहार कहा जाता है. श्रीहरि के विश्राम अवस्था में चले जाने के बाद मांगलिक कार्य जैसे- विवाह, मुंडन, जनेऊ आदि करना शुभ नहीं माना जाता है. मान्यता है कि इस दौरान मांगलिक कार्य करने से भगवान का आशीर्वाद नहीं प्राप्त होता है. शुभ कार्यों में देवी-देवताओं का आवाह्न किया जाता है. भगवान विष्णु योग निद्रा में होते हैं, इसलिए वह मांगलिक कार्यों में उपस्थित नहीं हो पाते हैं. जिसके कारण इन महीनों में मांगलिक कार्यों पर रोक होती है।

ग्रंथों के अनुसार पाताल लोक के अधिपति राजा बलि ने भगवान विष्णु से पाताल स्थिति अपने महल में रहने का वरदान मांगा था. इसलिए माना जाता है कि देवशयनी एकादशी से अगले 4 महीने तक भगवान विष्णु पाताल में राजा बलि के महल में निवास करते हैं। इसके अलावा अन्य मान्यताओं के अनुसार शिवजी महाशिवरात्रि तक और ब्रह्मा जी शिवरात्रि से देवशयनी एकादशी तक पाताल में निवास करते हैं।

चतुर्मास के चार महीने

चतुर्मास का पहला महीना सावन होता है. यह माह भगवान विष्णु को समर्पित होता है.दूसरा माह भाद्रपद होता है.यह माह त्योहारों से भरा रहता है। इस महीने में गणेश चतुर्थी और कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भी आता है. चतुर्मास का तीसरा महीना अश्विन होता है। इस मास में नवरात्र और दशहरा मनाया जाता है. चतुर्मास का चौथा और आखिरी महीना कार्तिक होता है। इस माह में दिवाली का त्योहार मनाया जाता है. इस माह में देवोत्थान एकादशी भी मनाई जाती है.जिसके साथ ही मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं।

इस साल 11 दिन पहले जन्माष्टमी 26 अगस्त को मनाई जाएगी. पिछले साल 7 सितंबर को थी. हरतालिका तीज 12 दिन पहले 6 सितंबर को है। गत वर्ष 18 सितंबर को थी। पितृपक्ष 18 सितंबर से शुरू होंगे, जो कि पिछले साल 30 सितंबर को शुरू हुए थे.नवरात्रि 3 अक्टूबर से शुरू होगी. दशहरा 12 अक्टूबर और दीपावली 1 नवंबर को मनाई जाएगी, एकादशी में चावल न खाने का धार्मिक महत्व है पौराणिक मान्यता के अनुसार माता शक्ति के क्रोध से बचने के लिए महर्षि मेधा ने शरीर का त्याग कर दिया और उनका अंश पृथ्वी में समा गया. चावल और जौ के रूप में महर्षि मेधा उत्पन्न हुए, इसलिए चावल और जौ को जीव माना जाता है. जिस दिन महर्षि मेधा का अंश पृथ्वी में समाया, उस दिन एकादशी तिथि थी, इसलिए इनको जीव रूप मानते हुए एकादशी को भोजन के रूप में ग्रहण करने से परहेज किया गया है, ताकि सात्विक रूप से विष्णु प्रिया एकादशी का व्रत संपन्न हो सके

चावल न खाने का ज्योतिषीय कारण

एकादशी के दिन चावल न खाने के पीछे सिर्फ धार्मिक ही नहीं बल्कि ज्योतिषीय कारण भी है. ज्योतिष के अनुसार चावल में जल तत्व की मात्रा अधिक होती है. जल पर चन्द्रमा का प्रभाव अधिक पड़ता है.ऐसे में चावल खाने से शरीर में जल की मात्रा बढ़ती है और इससे मन विचलित और चंचल होता है. मन के चंचल होने से व्रत के नियमों का पालन करने में बाधा आती है।

देवशयनी एकादशी व्रत का महत्वभविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि पद्म पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति देवशयनी एकादशी का व्रत रखता है.वह भगवान विष्णु को अधिक प्रिय होता है. साथ ही इस व्रत को करने से व्यक्ति को शिवलोक में स्थान मिलता है. साथ ही सर्व देवता उसे नमस्कार करते हैं. इस दिन दान पुण्य करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।


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