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बिना प्रक्रिया के घरों को ढहाना खतरनाक : जस्टिस बी.आर. गवई प्रशासन की ‘बुलडोजर नीति’ पर पूर्व सीजेआइ की कड़ी टिप्पणी

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बिना प्रक्रिया के घरों को ढहाना खतरनाक : जस्टिस बी.आर. गवई
प्रशासन की ‘बुलडोजर नीति’ पर पूर्व सीजेआइ की कड़ी टिप्पणी

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व प्रधान न्यायाधीश बी.आर. गवई ने देश के विभिन्न राज्यों में आरोपितों के घरों को बिना विधिक प्रक्रिया के बुलडोज़र से ढहाए जाने की कार्यवाही को खतरनाक बताते हुए प्रशासन की तीखी आलोचना की है। पिछले सप्ताह सेवानिवृत्त हुए जस्टिस गवई ने स्पष्ट कहा कि कार्यपालिका न्यायालय की भूमिका नहीं निभा सकती और बिना नोटिस व कानूनी प्रक्रिया के किसी का घर ढहाना मौलिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है।

एक साक्षात्कार में पूर्व सीजेआइ ने कहा कि वर्तमान समय में प्रशासन जिस तरीके से न्यायालय की तरह फैसले लेकर घरों को ढहा रहा है, वह बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा—
“प्रशासन अपनी मर्जी से किसी को दोषी ठहराकर उसके घर को गिरा देता है, जबकि उस घर में कई अन्य निर्दोष लोग भी रहते हैं जिनका अपराध से कोई संबंध नहीं होता। यदि कोई व्यक्ति आपराधिक गतिविधि में शामिल है तो क्या उसका परिवार भी अपराधी हो जाएगा?”

जस्टिस गवई ने स्पष्ट किया कि बिना नोटिस, बिना सुनवाई का अवसर दिए और बिना निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए की गई ऐसी कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट स्वयं संज्ञान लेने का अधिकार रखता है।
उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल आरोपी के अधिकारों का हनन है बल्कि उन परिवारों के मूल अधिकारों का भी उल्लंघन है, जिनकी कोई संलिप्तता नहीं होती।
“यह कानून को हाथ में लेने जैसा है और कार्यपालिका न्यायालय जैसा काम नहीं कर सकती।”

न्यायाधीशों पर हमलों पर कही बात

न्यायपालिका पर बढ़ते राजनीतिक व सामाजिक हमलों पर जस्टिस गवई ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा—
“न्यायाधीशों की आलोचना करना अच्छी बात नहीं है। इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता और उसकी प्रतिष्ठा प्रभावित होती है।”

राजनीतिक दबाव से किया इनकार

एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि अपने पूरे कार्यकाल में उन्हें कभी भी किसी राजनीतिक दल या कार्यपालिका की ओर से कोई दबाव नहीं झेलना पड़ा और उन्होंने सभी निर्णय कानून और अपने विवेक के आधार पर ही दिए।

Rajeev Chawla


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