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निजी स्कूलों का नया सेमेस्टर स्टार्ट” बिना मान्यता के चल रहे स्कूल कर रहे नोनीहालों का भविष्य खराब” आंखें मूंदे बैठा है शिक्षा विभाग……

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ख़बर पड़ताल ब्यूरो:- Uttarakhand” में कई स्कूलों के पास मान्यता नहीं है, फिर भी बच्चों को दाखिला दे रहे हैं। स्कूल की यूनिफार्म बचे रहे हैं। ट्रांसपोर्ट की सुविधा भी उपलब्ध करा रहे हैं, बेसिक शिक्षा विभाग अनजान बना हुआ है। बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है।

स्कूलों में एक अप्रैल से शुरू होने वाले नए सत्र की पूरी तैयारी कर ली गई है। बच्चों के दाखिले की प्रक्रिया चल रही है। ये बिना मान्यता के स्कूल बच्चों से मनमाने तरीके से फीस वसूलते हैं साथ ही अपनी तय की हुई दुकान से ही स्कूल ड्रेस खरीदने को अभिभावकों को मजबूर किया जाता है।

वहीं राज्य के उधमसिंहनगर जिले में भी शिक्षा से अनजान परिजनों को अपनी बातों में बहला फुसलाकर उनके बच्चों को अपने स्कूल में दाखिला दिलवाया जाता है और फिर अभिभावकों से मनमाने तरीके से फीस वसूली जाती है और उनकी कमीशन बंधी हुई दुकानों से स्कूल ड्रेस खरीदने को मजबूर किया जाता है, ये चालबाज लोग अपने स्कूल का संचालन शहर की मलिन बस्तियों करते हैं और परिजनों को भरोसे में लेकर बाद में उनके भरोसे का कत्ल करते है, ऐसा ही एक मामला रुद्रपुर शहर के ट्रांजिट कैंप से सामने आया है जहां डायमंड नेशनल स्कूल का फर्जी तरीके से वार्ड नंबर 1, गली नंबर 2, शिमला बहादुर ट्रांजिट कैंप (रुद्रपुर) में संचालन किया जा रहा है। यहां इंटर तक के बच्चों को शिक्षा दी जाती है लेकिन आरोप है कि स्कूल के पास कोई मान्यता नहीं है। इस मामले में मुख्य शिक्षा अधिकारी से शिकायत की गई है। जब सुमित निषाद नाम का व्यक्ति यहाँ जानकारी लेने गया तो स्कूल संचालक विजय निषाद ने उसे धमकी दी। मुख्य शिक्षा अधिकारी ने इस मामले में कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।

कई स्कूलों दो कमरों में चल रहें हैं तो कुछ स्कूल बिना मानकों को चल रहे हैं अगर कोई आपातकाल स्थिति हो तो बच्चों के भागने की जगह तक नहीं है, न इन स्कूलों में मैदान है, न आपातकालीन स्थिति के लिए फायर एक्सटिंग्विशर तक उपलब्ध नहीं होते, इसके अलावा बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी कई और चीजों की कमी भी पाई है। साथ ही साथ बच्चों को ऐसे शिक्षक पढ़ाते हैं जिनकी योग्यता बहुत कम होती है।

स्कूल में किन किन मानकों पर ध्यान देना चाहिए..

शिक्षक

स्कूल में योग्यता, ज्ञान, और पेशेवर शिक्षक होने चाहिए. शिक्षकों को छात्रों के व्यक्तिगत मानसिक विकास पर ध्यान देना चाहिए.

कक्षा का आकार

स्कूल की कक्षाएं संख्याशाही होनी चाहिए.

विशेषज्ञ शिक्षा कार्यकर्ता

स्कूल में विशेषज्ञ शिक्षा कार्यकर्ता होने चाहिए जो छात्रों को विशेष शिक्षा की आवश्यकताओं को समझने और समर्थन करने में मदद कर सकें.

सुविधाएं

स्कूल में पुस्तकालय, कंप्यूटर लैब, फ़िज़िक्स, केमिस्ट्री, बायो, मैथ लैब, प्ले ग्राउंड, लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग टॉयलेट, पीने के पानी की व्यवस्था, और फ़ायर बचाव के उपकरण होने चाहिए.

बड़ा सवाल ये है की इन मानकों के बिना आखिर ये स्कूल किसके संरक्षण में संचालित हो रहे हैं कौन है इसका कर्ता धर्ता, जिससे बिना किसी खौफ के ये लोग स्कूल का संचालन कर रहे हैं..

लेकिन आखिर कब उत्तराखंड में इन स्कूलों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई की जाएगी, कब इन लोगों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा, जिससे आगे कभी भविष्य में इस तरह के स्कूलों को संचालित न किया जाए ताकि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो…


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