
किच्छा में हो रहे अवैध खनन मामले पर नैनीताल हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से मांगा शपथपत्र, अगली सुनवाई 9 जनवरी को
नैनीताल।
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने ऊधमसिंह नगर जिले के सिरोलीकलां सहित आसपास के करीब पांच गांवों में हो रहे कथित अवैध खनन के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को जिला खनन अधिकारी की रिपोर्ट पर शपथपत्र सहित आपत्ति दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले में अगली सुनवाई 9 जनवरी को होगी।
सोमवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि जिला खनन अधिकारी द्वारा कोर्ट में प्रस्तुत की गई रिपोर्ट खनन नियमों और मानकों के अनुरूप नहीं है। याचिकाकर्ता ने यह भी तर्क दिया कि यदि भूमि राजस्व श्रेणी की है, तब भी खनन के लिए विधिवत अनुमति लेना अनिवार्य था।
सिरोलीकलां निवासी मोहम्मद इमरान रजा सहित अन्य ग्रामीणों द्वारा दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि सिरोलीकलां और उससे सटे पांच गांवों में बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया जा रहा है। इससे जहां भूमि का भारी कटाव हो रहा है, वहीं पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।
याचिका में बताया गया कि अवैध खनन के कारण जमीन में 15 से 30 फीट तक गहरे गड्ढे बन गए हैं। बीते वर्ष इन्हीं गड्ढों में पानी भरने से दो मासूम बच्चों की मौत हो गई थी। आरोप है कि जब ग्रामीणों ने अवैध खनन का विरोध किया तो उन्हें डराया-धमकाया गया। याचिकाकर्ताओं ने यह भी दावा किया है कि वर्तमान में भी क्षेत्र में अवैध खनन जारी है, जिसके फोटोग्राफ साक्ष्य के रूप में न्यायालय में प्रस्तुत किए गए हैं।
