
अंकिता भंडारी हत्याकांड: पिता वीरेंद्र भंडारी की उत्तराखंड की जनता से भावुक अपील, 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का आह्वान
ख़बर पड़ताल ब्यूरो। उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी के चर्चित हत्याकांड ने करीब तीन वर्ष बाद एक बार फिर सियासी और सामाजिक हलकों में उबाल ला दिया है। मामले में अब तक वीआईपी के खिलाफ कार्रवाई न होने से नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। इसी कड़ी में अंकिता भंडारी के पिता वीरेंद्र भंडारी ने उत्तराखंड की जनता से भावुक अपील करते हुए 11 जनवरी को प्रस्तावित उत्तराखंड बंद को सफल बनाने का आह्वान किया है।
वीरेंद्र भंडारी ने कहा कि उनकी बेटी सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड की बेटी थी और उसकी हत्या को तीन साल बीत जाने के बाद भी उसे पूर्ण न्याय नहीं मिल पाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लगातार वीआईपी को बचाने का प्रयास कर रही है, जिसके चलते मामले की निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
उन्होंने कहा कि जिस तरह से यह मामला धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की जा रही है, उससे आम जनता का न्याय व्यवस्था से भरोसा उठता जा रहा है। वीरेंद्र भंडारी ने कहा, “अगर आज अंकिता को न्याय नहीं मिला तो कल किसी और बेटी के साथ भी ऐसा हो सकता है। इसलिए यह लड़ाई सिर्फ मेरी बेटी की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है।”
अंकिता भंडारी के पिता ने 11 जनवरी को प्रस्तावित उत्तराखंड बंद को लेकर व्यापारियों, सामाजिक संगठनों, युवाओं और आम नागरिकों से सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से बंद कर सरकार पर दबाव बनाया जाए ताकि वीआईपी की गिरफ्तारी हो और अंकिता को न्याय मिल सके। उन्होंने विशेष रूप से व्यापारिक संगठनों से अनुरोध किया कि वे एक दिन के लिए अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर इस जनआंदोलन को मजबूती दें।
वीरेंद्र भंडारी ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी के नेता और सरकार से जुड़े लोग कथित वीआईपी को बचाने में जुटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार वास्तव में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के नारे को गंभीरता से लेती है तो उसे अंकिता के मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए।
उधर, प्रदेश भर में विपक्षी दलों, सामाजिक संगठनों और छात्र संगठनों द्वारा वीआईपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर जगह-जगह प्रदर्शन तेज हो गए हैं। कई जिलों में रैलियां, मशाल जुलूस और ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक मुख्य आरोपी और वीआईपी को कानून के कठघरे में नहीं लाया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर उत्तराखंड की राजनीति और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। 11 जनवरी को होने वाला उत्तराखंड बंद सरकार के लिए एक अहम परीक्षा माना जा रहा है, जिसमें जनता की भूमिका निर्णायक साबित हो सकती है।
